सेक्स, सेनसेक्स और सोनागाछी
सेक्स, सेनसेक्स और सोनागाछी
पलाश विश्वास
नीली क्रान्ति का वाहक क्रिकेट कार्निवाल और सूचना महाविस्फोट। अपसंस्कृति के संक्रमण से भारतीय पहचान खतरे में।आज अगर दादा माखनलाल चतुर्वेदी जीवित होते तो समकालीन पत्रकारिता का स्वरुप कैसा होता। मुख्य धारा की पत्रकारिता में सामाजिक सरोकारों को लेकर उनका कितना हसक्षेप होता।
सारा जोर देश, समाज, राज्य, जनपद और परिवार के विघटन पर, ताकि ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ता इकाइयां बनायी जा सकें। ताकि बाजार का सम्प्रभु विस्तार हो। बची रहे सिर्फ भद्र सोसाइटी, जिसके पास क्रय क्षमता हो। राष्ट्र शशक्ति इसी शासक वर्ग के कब्जे में। जनपद निश्चिह्न। जीवन और आजीविका के नैसर्गिक साधन बेदखल और प्रकृति से बलात्कार। बलात्कार मातृभूमि से।
अर्थ व्यवस्था नई विश्व व्यवस्था में सेक्स का खुल्ला खेल फर्रुखाबादी है। सेक्स, सेनसेक्स और सोनागाछी एकाकार है। सोनागाछी एक जीवन्त मांस का दरिया है। जिसका न ओर है न छोर। सोवियत विघटन के बाद रूसी वेश्यावृत्ति के किस्से दुनिया को मालूम है। दक्षिण पूर्व एशिया में सेक्स पर्यटन की बात अब सबको मालूम है। दूसरे महायुद्ध के दौरान जापानियों ने कोरियाई महिलाओ को कैसे सेक्स स्लेव में तब्दील कर दिया था, हमें मालूम है। भारत में अंग्रेजी हुकूमत के दौरान कैसे सजी मांस की मंडिया, सोनागाछी उसका हैरिटेज नमूना है। सैनिक छावनियों से जुड़ी वेश्यालयों का दिगन्त व्यापी विस्तार सवर्ण स्वतन्त्रता की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
अब नवउदार अर्थ व्यवस्था में उत्पादन प्रणाली की हत्या करते हुए इस पूरे महादेश में मूलनिवासियों का कत्लेआम चालू है। विस्थापन से महानगर अब महा चकलाघरों में तब्दील। महानगरों में सर्वत्र चलता फिरता चकलाघर। सेक्स पर्यटन भारत में भी चालू हो गया है। टीवी चैनलों और अखबारों ने सूचना को विनोदन मनोरंजन बनाने के फेर में सनसनीखोज सेक्स और अपराध को बढ़ावा दिया है। स्त्री को समाज, अर्थव्यवस्था और राजनीति में , परिवार और आजीविका में उसका वाजिब हक दिलाने के बजाय देहमुक्ति की नई मनुस्मृति में फांस लिया गया है। टीवी और अखबारों में अब नंगी स्त्री देह फोकस पर है। शराब, शबाब, स्टाइल और ब्रांड पर जोर। जन सरोकार सिरे से गायब। मुद्दे गायब। भाषा से खिलवाड़। बेशर्मी से देशी भाषाओं की पहचान मिटाई जा रही है। लोग मस्ती में हैं। विरोध का सवाल कहां है। जो बालीवूड कभी राष्ट्रीय एकता और अखंडता का सबसे बड़ा प्रवक्ता बना हुआ था , वह अब ग्लोबल और कारपोरेट होकर जादुई यथार्थ, सेक्स और अपरा में सीमाबद्ध। साहित्य में जनपद गायब। सबकुछ अब मेट्रो है।
सूचना तकनीक ने ज्ञान को तकनीक में तब्दील कर दिया है। उच्च शिक्षा और शोध हाशिए पर। सारा जोर अंग्रेजी बोली और कम्प्यूटर सीखने पर। मोबाइल हर हाथ में। घर घर इंटरनेट। नीली फिल्मों के बगैर यह सारा कारोबार कैसे चले? जनता की बुनियादी जरुरत की चीजें महंगी होती जा रही हैं, पर वाहन, टीवी, मोबाइल, कम्प्यूटर, फोन और ऐशो आराम के सामान सस्ते होते जा रहे हैं। अमीरों के लिए हवाई और रेलवे यात्राएं सस्ती होती जा रही हैं। फुटकर बाजार से किसान और व्यापारी बेदखल होते जा रहे हैं। शापिंग माल गलीगली में। सारे खेल खत्म। सिर्फ क्रकेट कार्निवाल जारी। शरद पवार से लेकर राहुल प्रियंका तक क्रिकेट में निष्णात। यङ क्या हो रहा है? क्यों हो रहा है? लाखों लोगों की मौजूदगी में स्त्री देह का निर्लज्ज प्रदर्शन?
कम्प्यूटर सीखाने क दुकानें और साइबर कैफे गांव गांव शहर शहर फैल गये हैं। वहां क्या होता है? नीली फिल्में कैसे बनती हैं? देहात से लड़कियों वेश्या बाजार में कैसे खपायी जाती है? नीली फिल्मों का चस्का लगाकर, चैटिंग के बहाने कितनी लड़कियां अनन्त सोनागाछी में समाहित। सार्वजनिक यौनाचार अब लोगों की आंखों में खटकती नहीं। सनसनीखेज वाकये होते हैं और आंखें चकाचौंध। प्रेम कहानियों के नेपथ्य में देह का जो कारोबार है, जनपदों तक जिस्म फरोशी का जो विस्तार है और फिर औरतों की तस्करी, उससे समाज की सेहत खत्म। नयी पीढ़ी को खुले सेक्स की आजादी और नीली क्रान्ति में उलझाकर नरमेध यज्ञ का आयोजन।
सेक्स और सेनसेक्स के कारोबार में गांव गांव तक पसर रहा है सोनागाछी।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में शामिल होकर भारतीय समाज अब अमेरिकी है। खान, पान, रीति रिवाज, परंपरा, लोक, साहित्य संस्कृति समाज सबका कायाकल्प। देशज कुछ भी बचता नजर नहीं आता। जेस और जनपद विस्थापन के शिकार। विभाजन की तलवार लटक रही है सिर पर। राजनीति इसीको कैश करती हुई चक्रव्यूह में नाकाबंदी कर रही है भविष्य को। जहां अनन्त अंधेरी सुरंगों के सिवाय कुछ नहीं है।
अमेरिकी युद्धबाजों के चक्रान्त के शिकार होकर हम खुद भोग के बहाने विभाजन, विघटन के शिकार बनते जा रहे हैं।
सेक्स रैकेट के भंडाभोड़ के सिलसिले में गोआ पुलिस अंतरराष्ट्रीय सेक्स रैकेट में कथित रूप से शामिल नागपुर के एक युवक की तलाश कर रही है। रैकेट में उज्बेकिस्तान की एक महिला भी शामिल है। अपराध शाखा ने बताया कि नागपुर का रहने वाला नौजवान रोहित त्रिवेदी और उज्बेकिस्तान की एक महिला गुलनोवा जुर्यू पिछले दो वर्षों से गोआ से अंतराष्ट्रीय सेक्स रैकेट चला रहे हैं।
सेनसेक्स सूचकांक में पिछले दिनों आए भूकंप से भी यह स्पष्ट हो जाता है. आर्थिक दैनिक हांडेल्सब्लाट का कहना है कि भारत का आर्थिक जगत अनुमान से कहीं अधिक विश्वव्यवस्था से जुड़ा हुआ है. इस सिलसिले में आगे कहा गया है - सूचना तकनीक के बड़े फ़र्मों का दो तिहाई व्यापार अमरीका में है. रुपये की तुलना में डालर की मंदी से अन्य उत्पादों के निर्यात पर दबाव पड़ रहा है. भारतीय अर्थव्यवस्था पर अपने लेख में फ़्रैंकफ़ुर्ट के दैनिक फ़्रैंकफ़ुर्टर अलगेमाइने त्साइटुंग ने लिखा है कि मुम्बई के शेयर सूचकांक सेनसेक्स ने जनवरी से 27 प्रतिशत खोया है और इस निचली रुझान का कोई अंत नहीं दिख रहा. भारतीय अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण ग्राहक अमेरिका में बैठे हैं और अमेरिकी अर्थव्यवस्था संकट में है. सबसे ऊपर अमेरिका में आसन्न मंदी की तलवार लटक रही है. आपने देश की स्वतन्त्रता, सम्प्रभुता, लोकतन्त्र को दांव पर लगाकर नवउदारवादी नई विश्व व्यवस्था के नाम पर देश की अर्थ व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया। जीवन और आजीविका के नैसर्गिक संसाधनों से लैस कृषि की हत्या कर दी। प्राकृतिक संसाधनों को अमेरिकी श्वेत यहूदी आकाओं के हवाल करते हुए देशभर में मूलनिवासी अछूतों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के कत्लेआम का बंदोबस्त चाकचौबन्द कर दिया। मलाईदार तबके के ग्लोबल सत्तावर्ग के साझेदार और पराजीवी नौकरशाहों, काले कारोबारियों, बिल्डरों, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों, बाहुबलियों और माफिया से गढजोड़ करके रंग बिरंगे झण्डों और विचारधाराओं के तहत खले बाजार से श्रमजीवी आम जनता को बेदखल कर दिया। आजीविका और जीवन से विस्थापन का कारोबार शुरूकिया। गली गली में नीली क्रान्ति के दरवाजे खोल दिये। कम्प्यूटर, टीवी, मीडिया के जरिए जनता को अफीम का आदी बनाकर प्रतिरोध की सारी दीवारें ध्वस्त कर दी। नई पीढ़ी को शिक्षा और रोजगार के अवसरों से वंचित करते हुए लाचार अपाहिज बना दिया। बार, रेस्तरां, साइबर रियेलिटी, शापिंग माल, अटो मोबाइल, शराब, फैशन, क्रिकेट कार्निवाल, फैशन, ब्राण्ड, स्टाइल और भोग के जरिये सम्भोग से समाधि का राजमार्ग तैयार कर दिये महानगरों से राजपथ तक। अर्थ व्यवस्था को अमेरिकी उपनिवेश में तब्दील कर देने का नतीजा यह निकला कि शाइनिंग इण्डिय. सुपर पावर हिन्दू राष्ट्र का इकलौता पैमाना शयर सूचकांक चारों खाने चित्त हो गया। महाविनाश के मारण उद्योग पर आधारित अमेरिकी यहूदी नियन्त्रित श्वेत अर्थव्यवस्था को उत्तर आधुनिक आकाश गंगा मनुस्मृति रंगभेदी साम्राज्यवाद को लागू करने के एकमात्र उपाय बतौर अपनाकर भारतीय सवर्ण सत्तावर्ग हजारों साल से जारी अस्पृश्यता तन्त्र को जारी रखना चाहती है हर कीमत पर। कदम कदम पर संविधान की हत्या होती है। लोकतन्त्र, मानवाधिकार, नागरिक अधिकार, मानवता, मूल्यबोध,मातृभाषा, राष्ट्रीयता, समाज ,संस्कृति सबपर हावी हो गया बाजार, जिसमे प्रवेश के लिए आम आदमी की क्रयशक्ति भी उससे छीन ली गयी है। भारत विभाजन के जरिये विभाजन पीड़ित विस्थापित करोड़ों मूलनिवासियों के बलिदान की कीमत पर अर्जित स्वतन्त्रता अब बरतानिया हुकूमत और उससे भी पहले मुगलिया सल्तनत की चाकरी बजाते सामन्तों की जागीर बन गयी है। कोलकाता, पूना, मिथिला और कान्यकूब्ज के ब्राह्मण वर्चस्व में कोई कमी न हो , इसका इन्तजाम वाम, दक्षिण विचारधाराओं के साथ कांग्रेस, गैरकांग्रेस पार्टियों , गांधीवाद, लोहियावाद, समाजवाद इत्यादि फर्जीवाड़े और व्यक्ति करिश्मा और हितों, महत्वाकांक्षाओं से जुड़ी बहुमत आधारित संयुक्त चुनाव प्रणाली के जरिये कर दी गयी। जिससे दलाल तबके को खुला खेलने की छूट मिल गयी। राष्ट्र व्यवस्था या तो कत्लेआम करती फौजी पुलिसिया इंतजाम है, या सीमित असीमित विशेष सैन्य अधिकार या वोट बैंक और मनचाहा जनसंख्या समायोजन है या फिर सत्ता के लिए अल्पमत समूह कुछ जातियों का क्लब, हजारों दूसरी जातियों , समुदायों. भाषाओं, राष्ट्रीयताओं, समाजों, संस्कृतियों, मातृभाषाओं, आस्थाओं को कुचलने का पर्याय है यह या फिर सेज के बहाने जैविकी रसायनिक प्रयोगशालाएं जैसे भोपाल गैसत्रासदी या फिर न्राम कलिंगनगर, सिंगुर, नोएडा, बरनाला, नन्दीग्राम, नवी मुम्बई, गुजरात, अयोध्या, आपरेशन ब्लू स्टार, नक्सलवाद माओवाद दमन के नाम मूलनिवासियों का कत्लेआंम है यह या फिर तेलंगना, श्रीकाकुलम, ढिमरी ब्लाक , मरीचझांपी के विश्वासघात और कत्लेआम का अनन्त सिलसिला है यह।
ऐसे ही कुछ सवालों को उठाते हुए नवभारत टाइमस, दिल्ली के सम्पादक मधुसूदन आनंद जी ने माखन दादा के जन्म दिवस पर आयोजित स्मृति व्याख्यान को संबोधित किया।श्री आनंद के अनुसार, समकालीन मीडिया परिदृश्य बेहद सकारात्मक, संभावनापूर्ण, शिक्षित और रोज़गार परक है परन्तु साथ ही मीडिया कुछ हद तक अपसंस्कृति फैलाने का काम भी कर रही है, इसमे कोई शक नही है।इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति आर डी शुक्ला ने मीडिया के व्यवसायीकरण का तीखे शब्दों में विरोध किया और साथ ही आदर्शों और मूल्यों पर आधारित पत्रकारिता का आह्वान भी किया।
विगत सोलह-सत्रह वर्षों में अपसंस्कृति जिस तेजी से फैली है, अश्लीलता का जहर जिस तरह फैला है, उस पर प्रबुद्ध वर्ग का भी चिन्तित न दिखना एक खतरनाक चिह्न है । किसी भी समाज के नैतिक पतन में यह हम सबकी परोक्ष भूमिका है, क्योंकि हम न विरोध के स्वर उठाते हैं और न ही इस माध्यम के रचनात्मक सुनियोजन के कदम उठाते हैं ।
संगीत सम्मेलन, कवि सम्मेलन, अभिनय, नृत्य, नाटक आदि के क्षेत्र सिकुड़ते-सिकुड़ते मरणासन्न होते चले जा रहे हैं, सबकी आत्मा धीरे-धीरे सिनेमा में समाती जा रही है । यह सिनेमा यदि आदर्शवादिता, उत्कृष्टता, समाज निर्माण, समस्याओं के हल एवं विश्वशांति की ओर उन्मुख रहा होता, तो स्वस्थ मनोरंजन के साथ लोकमंगल की आशाजनक संभावनाएँ प्रस्तुत कर सकता था । प्रेरक प्रसंगों का कहीं नामोनिशान नहीं । अधिकतर कामुकता, अश्लीलता, हिंसा, उच्छृंखलता एवं पशुप्रवृत्ति को भड़काने वाले प्रसंग ही मिलेंगे । उन्हें रुचि पूर्वक देखने वाली जनता किधर चल रही है, इसे सहज ही परखा जा सकता है । दुष्प्रवृत्तियाँ नयी पीढ़ी में आँधी तूफान की तरह पनप रही हैं, जिसकी प्रतिक्रिया अवांछनीय घटनाओं के रूप में अगले दिनों आने वाली है ।
सिनेमा का ही दूसरा अवतार मल्टीप्लेक्स, पी.वी.आर आदि के रूप में आया है । लगता है कि नया अमीर बना भारतीय अब पैसे खर्चने लगा है एवं मेहनत के अलावा मनोरंजन में भी समय देता है । पर वही मूल्यहीन, सस्ते मनोरंजन वाली फार्मूला फिल्में छायी हुई हैं । यदाकदा कोई एक स्वच्छ फिल्म आ गई, तो बात अलग है । पूरा बाजार बॉलीवुड एवं हॉलीवुड की सेक्सप्रधान, हिंसाप्रधान फिल्मों से भरा पड़ा है । यहीं तक बात होती तो ठीक था, पर अब होम थिएटरों की बाढ़ आ गयी है । घर-घर में टी.वी. सेटों पर तथा प्रोजेक्शन के माध्यम से 15-20 व्यक्तियों के लिये DVD द्वारा फिल्में कहीं भी, कभी भी, किसी भी प्रकार की दिखाए जाने का स्वरूप जो विगत पंद्रह वर्षों में बना है, उसने तो इस मीडिया की पहुँच करोड़ों व्यक्ति तक पहुँचा दी है । चैनेल भी सैकड़ों आ गए ।
केबल टीवी एवं डायरेक्ट टू होम सेवा (डीटीएच) द्वारा अब समाचारों में भी अश्लीलता, हास्यसम्मेलन या धारावाहिक के रूप में सस्ते चुटकुलों का-अश्लील मनोरंजन का क्रम चल पड़ा है । धारावाहिक परिवारों को तोड़ रहे हैं । नारी को न केवल श्रृंगारिकता का पर्याय बना दिया है, वह खलनायिका है-दुष्टा है एवं कुछ भी कर सकती है-यह दर्शाया जाता है । छोटे-छोटे बच्चों की नृत्य प्रतियोगिताओं में उनकी भाव भंगिमाएँ जो भड़काऊ दिखाई जाती हैं, देखकर लगता है कि गर्व से प्रसन्न इनके माता-पिता यह सब कैसे सहन करते हैं । अभी किशोरावस्था आने से पूर्व यह हाल है, तो आगे क्या होगा?
अर्थ व्यवस्था नई विश्व व्यवस्था में सेक्स का खुल्ला खेल फर्रुखाबादी है। सेक्स, सेनसेक्स और सोनागाछी एकाकार है।सोनागाछी कोलकाता का रेड लाइट एरिया (वेश्या द्वारे) है, जहाँ की मिट्टी से बनी मूर्तियों की प्राचीन मान्यताओं के चलते नवरात्र के दिनों में हर बार सर्वाधिक बिक्री होती है। इस मिट्टी से बनी एक मूर्ति की कीमत पाँच हजार रुपए से लेकर 15 हजार तक है।नवरात्र चाहे जितने पवित्र क्यों न माने जाते हों, लेकिन इस अवसर पर महिषासुर मर्दिनी देवी दुर्गा की वेश्याओं के मोहल्ले सोनागाछी की मिट्टी से बनी प्रतिमाओं की श्रद्धालुओं में सबसे अधिक माँग है।
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में दो महिलाओं से दुष्कर्म के बाद शनिवार को फिर से हिंसा भड़क उठी। जिसमें 8 बीयूपीसी समर्थक घायल हो गए। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भूमि उच्छेद परिषद के सदस्यों के बीच हुई झड़प में कई लोग घायल हो गए हैं। हिंसा के बाद इलाके में तनाव फैल गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा लूटपाट के दौरान दो महिलाओं से दुष्कर्म की खबर फैलने के बाद दोनों तरफ से भारी गोलीबारी की गई।
स्थिति को नियंत्रण रखने के लिए पुलिस तथा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान लगातार गश्त कर रहे हैं। एक अन्य एजेंसी के अनुसार दुष्कर्म पीडि़तों में एक तणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी की सहयोगी शामिल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दो महिलाओं से दुष्कर्म की खबर फैलने के बाद सत्ताधारी माकपा और भूमि अधिग्रहण विरोधी मंच भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी [बीयूपीसी] के कार्यकर्ताओं में झड़प शुरू हो गई। इस झड़प में 8 बीयूपीसी कार्यकर्ता घायल हो गए।
पूर्वी मिदनापुर के पुलिस अधीक्षक एस पांडा ने बताया कि संघर्ष की खबर मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया गया है। पांडा ने बताया कि संघर्ष में घायल लोगों को नंदीग्राम के प्राथमिक उपचार केंद्र में भर्ती करा दिया गया है।
इस बीच, तृणमूल कांग्रेस [टीसी] के प्रखंड प्रमुख और भूमि अधिग्रहण विरोधी मंच के संयोजक अबू ताहेर ने आरोप लगाया है कि माकपा कार्यकर्ताओं ने तड़के करीब दो बजे गांवारें को जूटा और नंदीग्राम के अधिकारीपारा गांव में लूटपाट के दौरान दो महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया। माकपा ने इन आरोपों का खंडन किया है। माकपा के स्थानीय नेता अशोक गुरिया ने आरोप लगाया है कि दोनों पक्षों के बीच संघर्ष उस समय शुरू हुआ जब तृणमूल के समर्थकों ने उनकी पार्टी के समर्थकों के घरों पर धावा बोल दिया। उन्होंने बताया कि तृणमूल कांग्रेस नंदीग्राम में लोकप्रियता खो चुकी है, इसलिए लोगों का ध्यान बांटने के लिए वह इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रही है। तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों ने माकपा पंचायती समिति के सदस्य की पिछले साल हुई हत्या में लिप्त होने के कथित आरोप में अपने तीन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में कल नंदीग्राम पुलिस स्टेशन का घेराव किया था।
एक अन्य एजेंसी के अनुसार माकपा कार्यकर्ता पंचायत चुनाव के सिलसिले में एक रैली करना चाहते थे, जिसका भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति के कार्यकर्ता विरोध कर रहे थे। इसके बाद रात में माकपा कार्यकर्ताओं ने राधाकृष्ण आदि के घर का दरवाजा तोड़कर उसके पति की पिटाई की और फिर सामूहिक दुष्कर्म किया। इन दोनों को आज अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
अमेरिकी
राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती का प्रस्ताव तब तक लागू नहीं हो सकता है जब तक भारत व चीन जैसे देश इसके लिए तैयार नहीं हो जाते। बुश ने बुधवार को कहा कि क्योटो प्रावधानों को हर बड़ी अर्थव्यवस्था पर लागू किया जाना चाहिए और किसी को भी इससे छूट नहीं मिलनी चाहिए।
अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने कहा है कि किसी नए अंतरराष्ट्रीय क्लाइमेट पैक्ट के जरिए भारत और चीन जैसे देश ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने से पीछे नहीं हट सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत और चीन बड़ी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी को भी इस मुद्दे पर छूट नहीं दी जाएगी। बुश ने अमेरिका के लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी के लिए 2025 तक की समयसीमा तय की। गौरतलब है कि ग्रीनहाउस गैसें क्लाइमेट चेंज के लिए जिम्मेदार होती हैं।
वाइट हाउस में एनवायरनमेंट पर एक पॉलिसी स्पीच देते हुए बुश ने कहा कि भारत और चीन जैसे देश तेजी से आर्थिक विकास कर रहे हैं। जो उनके नागरिकों और दुनिया भर के लिए अच्छा है। मगर, वह बहुत अधिक मात्रा में विषैली गैसों का उत्सर्जन भी कर रहे हैं। हम एक नए क्लाइमेट अग्रीमेंट पर विचार कर रहे हैं, जिसमें किसी को भी छूट नहीं दी जाएगी। गौरतलब है कि क्योटो प्रोटोकॉल 2012 में खत्म हो रहा है।
वाइट हाउस में प्रेस सेक्रेट्री डाना पैरिनो ने कहा कि क्लाइमेट चेंज पर किसी ऐसे समझौते की जरूरत है, जो सबके लिए अच्छा हो और सभी को स्वीकार्य हो। करीब 80 फीसदी ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन दुनिया के 16 देशों से होता है।
इसे जुबान का फिसलना कहें या नासमझी, ऐसा लगता है अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के सुरक्षा सलाहकार स्टीफन हेडली को तिब्बत और नेपाल में फर्क नहीं पता। पिछले दिनों एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में हेडली ‘तिब्बत‘ को ‘नेपाल‘ बोलते रहे। दिलचस्प बात यह कि हेडली ने यह गलती कम से कम छह बार दोहराई। न तो उन्हें इसका अहसास हुआ और न ही इंटरव्यूअर ने उन्हें ध्यान दिलाने की जहमत उठाई।
तिब्बत में हिंसा के बारे में बोलते हुए हेडली ने कहा, ‘अगर दुनिया के देशों को वास्तव में नेपाल की चिंता होती तो वे ओपनिंग सेरेमनी में शिरकत करें या नहीं, जैसे गैर-मुद्दे नहीं उठाते….। उन्होंने आगे कहा, नेपाल मुद्दे से निपटने का तरीका यह है कि …। अगले कई सवालों के जवाब में भी हेडली तिब्बत की जगह नेपाल ही बोलते रहे। उन्होंने कहा, नेपाल मुद्दे पर …हमारा मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को नेपाल में मानवाधिकारों को लेकर चीन पर दबाव डालना चाहिए।
गौरतलब है कि पूरा इंटरव्यू जस का तस प्रसारित हुआ और बाद में वाइट हाउस के प्रवक्ता को गलती सुधारनी पड़ी। प्रवक्ता ने कहा कि असल में मि. हेडली तिब्बत के बारे में बात कर रहे थे और उन्होंने कई बार गलती से नेपाल बोल दिया।
फरीदाबाद : एनएच-3 के फ्रंटियर कॉलोनी में रहने वाली दो नाबालिग बहनों को भगा ले जाने के आरोप में पुलिस ने युवक को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि युवक ने उनके साथ दुष्कर्म किया था।
पुलिस ने एक महीने की छानबीन के बाद दोनों बहनों को ढूंढ कर आरोपी के चंगुल से छुड़ाया। शुक्रवार को थाना एसजीएम नगर पुलिस ने मेडिकल कराने के बाद युवक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। फ्रंटियर कॉलोनी में रहने वाले योगीराम (बदला नाम) बिजली बोर्ड में कैजुअल वर्कर के तौर पर काम करते हैं। 17 मार्च को उनकी दोनों नाबालिग बेटियां अचानक घर से गायब हो गईं। काफी तलाश करने के बाद जब वे दोनों नहीं मिलीं तो घटना के दूसरे दिन योगीराम ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी।
इस बीच, योगीराम को अपने पड़ोसियों से पता चला कि मुरादाबाद के भवाना माजरा का राम हरी को लोगों ने उनकी लड़कियों के साथ देखा था। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। मामले की तफ्तीश कर रही पुलिस को पता चला कि आरोपी उन दोनों बहनों को लेकर नोएडा के इलाके में रह रहा है। कई दिनों की मशक्कत के बाद पुलिस ने युवक का पता भी ढूंढ निकाला और गुरुवार शाम वहां पहुंचकर दोनों लड़कियों को उसके चंगुल से छुड़ा लिया। मामले की जांच कर रही एसजीएम नगर थाना पुलिस ने बताया कि आरोप है कि युवक ने उनके साथ दुष्कर्म भी किया।
लखनऊ। अभी तक तो सिर्फ यही आम उक्ति है कि इश्क अंधा होता है, परंतु इश्क किसी परिवार के एक नहीं बल्कि सभी सात सदस्यों के लिए मौत का सबब बन जाएगा, इसकी कल्पना मौजूदा समय में शायद ही कोई करे। वह भी तब जब उसी दुर्भाग्यपूर्ण परिवार की एक लड़की ने हैवान बनकर केवल अपने प्रेमी को पाने की खातिर माता-पिता व छोटे भाई-बहनों की जिंदगी अपने ही हाथों से छीन ली। परिजनों के लाख मना करने के बावजूद वह अपने प्रेमी से प्यार की पींगे बढ़ाती रही और आखिर में अपना प्यार परवान न चढ़ते देख प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही परिजनों के लिए यमराज बन बैठी। इस बेहद वीभत्स व दर्दनाक वाकये को अंजाम देने से पहले उस लड़की का दिल अपने माता-पिता व छोटे भाई-बहनों की जिंदगी के लिए तनिक भी नहीं पसीजा और अपने परिवार का समूल ही मिटा दिया। ऐसा करके उसने खून के रिश्ते, इंसानियत, मानवता आदि का ही गला नहीं घोटा बल्कि मानवीय समाज की सभी वर्जनाओं को भी तार-तार करके रख दिया। इस हृदयविदारक घटना को देख व सुन शायद इंसान यही कहने को विवश होगा कि भगवान ऐसी बेटी को किसी के घर जन्म ही न दे।
चौदह अप्रैल की रात ज्योतिबा फूले नगर [अमरोहा] में एक ही परिवार के सात सदस्यों की हत्या के मामले में पुलिस ने शबनम और सलीम को गिरफ्तार कर इस हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा किया। पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री मायावती के निर्देश पर पुलिस पूरी तत्परता से इस मामले को खोलने में लगी थी और अंतत: उसे सफलता हाथ लग ही गई। मायावती स्वयं यहां आई थीं। इस हत्याकांड में 24 वर्षीय शबनम ही एक मात्र जीवित बची थी क्योंकि वह छत पर सो रही थी। यह हत्याकांड हसनपुर थाना क्षेत्र के बावनखेड़ी गांव में हुआ था। जल्दी ही पुलिस को शबनम पर शक होने लगा और इसका आधार था घर का मजबूत लोहे का दरवाजा, जिसे तोड़कर अंदर आना संभव नहीं था। पुलिस यही मानकर चली कि दरवाजे को अंदर से ही खोला गया है। मारे गए सभी लोगों के शवों से भी पता चलता था कि ये सभी मूर्छित अवस्था में थे और प्रतिरोध किए जाने के कोई लक्षण नहीं मिले। शबनम के मोबाइल का विवरण प्राप्त करने के बाद पुलिस के हाथ महत्वपूर्ण सूत्र लगे। तीन महीने में 900 से ज्यादा बार उसकी बात उसी गांव में आरा मशीन चलाने वाले सलीम पुत्र अब्दुल रऊफ से हुई थी। दोनों के बीच गहरा इश्क था।
पुलिस महानिदेशक के अनुसार शबनम का परिवार हर दृष्टि से सलीम के परिवार से संपन्न था और शबनम स्वयं शिक्षा मित्र के रूप में कार्यरत थी। पारिवारिक रुतबे में बराबरी न होने के कारण शबनम के घरवालों ने दोनों की शादी से इनकार कर दिया था। शादी न करने देने से नाराज प्रेमी ने प्रेमिका के घरवालों को ही साफ करने का इरादा किया और इसमें उसका साथ प्रेमिका ने बखूबी निभाया। शबनम ने परिवार के सभी सदस्यो को बायापोज नामक नशीली दवा खाने में मिलाकर दे दी और जब वे बेहोश हो गए तो पूर्व निर्धारित योजनानुसार सलीम को फोन से बुलवा लिया।
उन्होंने बताया कि दोनो ने टार्च की रोशनी में परिवार के छह सदस्यों के गले काट दिए, जबकि एक बच्चे को गला घोटकर मार दिया। उन्होंने बताया कि तलाशी मे शबनम के घर से उसका रक्त रंजित सलवार कुर्ता और बायापोज की गोलियों का रैपर भी बरामद कर लिया गया है। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि सलीम और शबनम ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है।
पणजी। गोवा अब एमएमएस की क्लीपिंग से ब्लैकमेल किए जाने से दुखी दो कालेज छात्राओं की खुदकुशी के कारण चर्चा में आ गया है। खुदकुशी की घटना वैसे तो करीब एक माह पुरानी है पर अब विपक्षी दल भाजपा ने इसे मुद्दा बना लिया है। खुदकुशी करने वाली लड़कियां पोंडा की रहने वाली थीं। राज्य के गृह मंत्री रवि नायक इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। पोंडा उस जगह से काफी नजदीक है जहां ब्रिटिश किशोरी स्कारलेट कीलिंग की हत्या कर दी गई थी।
विधानसभा में विपक्ष के नेता मनोहर पारिक्कर ने शुक्रवार को बताया कि उन्होंने एमएमएस की सीडी मुख्य सचिव जेपी सिंह और पुलिस महानिरीक्षक बीएस बरार को सौंप दी है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे की जांच के लिए पार्टी की महिला शाखा राष्ट्रीय महिला आयोग से गुहार लगाएगी। लड़कियों ने 26 मार्च को तब खुदकुशी कर ली थी जब ट्रैवल एजेंसी चलाने वाले कुछ लोगों ने उनसे एमएमएस के सहारे संबंध बनाने की कोशिश की थी।
लंदन.
सेंसेक्स से सेक्स का रिश्ता पता चला है। एक अध्ययन के अनुसार शेयर मार्केट में कामयाबी के लिए सेक्स हारमोन टेस्ट्सटेरान जिम्मेदार होते हैं। यदि सुबह के समय इन हारमोंस का लेवल हाई रहता है तो दिन में मुनाफे के ज्यादा चांस रहते हैं। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में हुए इस शोध के अनुसार टेस्ट्सटेरान हार्मोन के असर से आत्मविश्वास और रिश्क लेने की क्षमता ज्यादा हो जाती है।
फाइनेंशल ट्रेडिग में कामयाबी के लिए इन दोनों ही गुणों की जरूरत है। मार्केट में काम करने वाले लोग खासा तनाव व दबाव महसूस करते हैं। उनके द्वारा इन सबके बीच किए गए फैसले कई बार बिजनेस ही नहीं बल्कि पूरी मार्केट पर प्रभाव डालते हैं। शोध के अनुसार येफैसले भावात्मक और हार्मोन से जुड़े कारकों से प्रभावित हो सकते हैं। हार्मोन के कारक की
अनदेखी नहीं:
अध्ययन के अनुसार दबाव के बीच वित्तीयफैसले लेने से जुड़ी कोई भी थ्योरी हार्मोन के कारक की अनदेखी नहीं कर सकती। बिना अनुमान के लिया गया जोखिम खतरनाक हो सकता है। मार्केट के माहौल में कोई टेंडर जैसा काम करता है। इसमें भी उसके हार्मोन की अहम भूमिका होती है। शोधकर्ता प्रोफेसर हर्बट के अनुसार हार्मोन लेवल के मार्केट पर व्यापक प्रभावों की जांच की जा रही है।
चेतावनी भीइन नतीजों के साथ एक चेतावनी भी शोधकर्ताओं ने दी है कि टेस्ट्सटेरान हार्मोन का जरूरत से ज्यादा बढ़ा लेवल गैरजरूरी रिस्क लेने क लिए भी उकसा सकता है। हार्मोन को टेंडरों पर असर जांचने के लिए शोधकर्ताओं ने उनका दिन में दो बार सेलाइवा टेस्ट किया एक बार बिनेस से पहले और दूसरा दिनभर के काम के बाद सैंपलिंग लेने के टाइम टेंडरों से प्राफिट और लॉस का भी हिसाब रखा गया। इस डाटा के आधार पर एनालिसिस करके निष्कर्ष दिए गए।
पोप बेनेडिक्ट सोलहवें ने अमेरिका के रोमन कैथोलिक नेताओं से कहा है कि कई बार चर्चों द्वारा पादरियों या धर्मगुरुओं के सेक्स कांडों को नियंत्रित करने का ढंग बहुत बुरा होता है। वॉशिंगटन में कल राष्ट्रीय पूजास्थल पर अमेरिका के हजारों बिशपों की मौजूदगी में हुई प्रार्थना सेवा के समय पोप की यह टिप्पणी आई है। पोप ने अमेरिका की अपनी यात्रा के दौरान दूसरी बार सेक्स कांडों पर अपनी टिप्पणी दी है और अभी तक की गई बिशपों की यह सबसे …
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सेंसेक्स से सेक्स का रिश्ता
दैनिक भास्कर - 16 अप्रैल 2008 सेंसेक्स से सेक्स का रिश्ता पता चला है। एक अध्ययन के अनुसार शेयर मार्केट में कामयाबी के लिए सेक्स हारमोन टेस्ट्सटेरान जिम्मेदार होते हैं। यदि सुबह के समय इन हारमोंस का लेवल हाई रहता है तो दिन में मुनाफे के ज्यादा चांस रहते हैं। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में हुए इस शोध के अनुसार टेस्ट्सटेरान हार्मोन के असर से आत्मविश्वास और रिश्क लेने की क्षमता ज्यादा हो जाती है। फाइनेंशल ट्रेडिग में कामयाबी के लिए इन दोनों ही गुणों की … |
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कामयाब बना सकता है सेंसेक्स और सेक्स का रिश्ता
नवभारत टाइम्स - 15 अप्रैल 2008 लंदन : सेंसेक्स से सेक्स का रिश्ता पता चला है। हालिया स्टडी के मुताबिक शेयर मार्केट में कामयाबी के लिए सेक्स हॉर्मोन टेस्ट्सटेरॉन जिम्मेदार होते हैं। अगर सुबह के समय इन हॉर्मोन्स का लेवल हाई रहता है तो दिन में मुनाफे के ज्यादा चांस रहते हैं। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में हुई इस दिलचस्प रिसर्च के मुताबिक टेस्ट्सटेरान हॉर्मोन के असर से आत्मविश्वास और रिस्क लेने की क्षमता में बढ़ोतरी हो जाती है। फाइनेंशल ट्रेडिंग में … |
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मुनरों की सेक्स रील बिकी 10.5 लाख डॉलर में
नवभारत टाइम्स - 14 अप्रैल 2008 इस फिल्म में मुनरो को किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ ओरल सेक्स करते दिखाया गया है। दी न्यू यॉर्क पोस्ट में प्रकाशित खबर के मुताबिक, यह फिल्म 1950 की उस 16 मिलीमीटर लंबी ब्लैक एंड वाइट क्लिपिंग का हिस्सा है, जो एफबीआई के कब्जे में रही है। ब्यूरो के प्रथम निदेशक एगर होवर ने बहुत प्रयास किए, लेकिन वह यह साबित करने में विफल रहे कि फिल्म में मौजूद अज्ञात व्यक्ति और कोई नहीं बल्कि अमेरिकी प्रेजिडेंट जॉन एफ. कैनेडी हैं। … |
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छोटी कक्षाओं में सेक्स एजुकेशन गैर-इस्लामी!
नवभारत टाइम्स - 13 अप्रैल 2008 नई दिल्ली : प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने छोटी कक्षाओं में सेक्स एजुकेशन शुरू करने की सरकार की योजना को इस्लाम के खिलाफ बताया है और इस प्रस्ताव को वापस लिए जाने की मांग की है। प्राइमरी और मिडल क्लासों में सेक्स एजुकेशन दिए जाने की योजना को वापस लिए जाने की यह मांग इस्लामिक फिकह एकेडमी के बैनर तले हुए एक कॉन्फ्रेंस में उठाई गई। कॉन्फ्रेंस में प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने सरकार के इस फैसले पर नाराजगी दिखाई। एक वरिष्ठ मौलाना … |
![]() याहू! भारत |
लाखों डालर में बिकी मुनरो की सेक्स क्लिप
याहू! भारत - 15 अप्रैल 2008 न्यूयार्क। बेहद खूबसूरत व विवादास्पद अभिनेत्री मर्लिन मुनरो की एक 15 मिनट की फिल्म क्लिपिंग एक व्यवसायी ने साढ़े दस लाख डालर में खरीदी। इस फिल्म की खासियत यह है कि मुनरो को किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया है। द न्यूयार्क पोस्ट में प्रकाशित समाचार के अनुसार यह फिल्म 1950 की उस 16 मिलीमीटर लंबी श्वेत-श्याम क्लिपिंग का हिस्सा है, जो संघीय जांच ब्यूरो [एफबीआई] के कब्जे में रही है। ब्यूरो के प्रथम … |
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सेक्स चाहिए या प्यार, बयां करता है चेहरा
नवभारत टाइम्स - 9 अप्रैल 2008 स्टडी में पाया गया कि सेक्स के मामले में मर्द और औरत के ख्याल एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। इस अध्ययन के नतीजे ‘ इवॉल्यूशन एंड ह्यूमन बिहेवियर ‘ नाम के जर्नल में छपे हैं। इस अध्ययन में शामिल लोगों को 20-25 साल की महिलाओं और पुरुषों के फोटो दिखाए गए। उनसे पूछा गया कि वे फोटो में लोगों का चेहरा देखकर बताएं कि उनमें किस औरत या मर्द की पहली पसंद अस्थायी यौन संबंध , रात भर के रिश्ते और मोहब्बत के बिना सेक्स की होगी। उनसे यह भी पूछा … |
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अकोला सेक्स कांड में एसपी निलंबित
वेबदुनिया हिंदी - 9 अप्रैल 2008 महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री आरआर पाटील ने बुधवार को राज्य विधानसभा में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी दीपक पांडे को बहुचर्चित ‘अकोला सेक्स कांड’ की जाँच पूरी होने तक निलम्बित करने की घोषणा करने के साथ ही गृह विभाग के कामकाज को लेकर विपक्ष के विभिन्न आरोपों का प्रतिरोध किया। पाटील ने, जो कि गृहमंत्री भी हैं, राज्य सरकार के वर्ष 2008-09 के बजट के तहत गृह विभाग की अनुदान माँगों पर सदन में हुई चर्चा के उत्तर में अकोला के पुलिस … |
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सेक्स पॉवर बढ़ाने वाली दवा से मौत
वेबदुनिया हिंदी - 8 अप्रैल 2008 सेक्स क्षमता बढ़ाने वाली अवैध गोलियों के सेवन से सिंगापुर में एक व्यक्ति की मौत हो गई। सिंगापुर के स्वास्थ्य सेवा प्राधिकरण का कहना है कि यह बेहद चिंता का विषय है क्योंकि इस बाबत लगातार चेतावनियाँ जारी की गईं हैं, लेकिन कई लोग इसके बावजूद इस तरह की गोलियों का सेवन कर रहे हैं। प्राधिकरण के एक बयान में कहा गया है कि सिंगापुर में रहने वाले एक अधेड़ व्यक्ति ने मार्च माह में सेक्स क्षमता बढ़ाने वाली गोलियाँ खाई थीं। … |
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ग्राहक बता रहे हैं एड्स से बचने के उपाय
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एक कहावत है कि लोहा ही लोहे को काटता है.
कोलकाता के रेडलाइट इलाक़े सोनागाछी में वेश्याओं के हितों की लड़ाई लड़ने वाली संस्था ‘दुर्बार महिला समन्वय समिति’ ने शायद इसी कहावत पर भरोसा रखते हुए एक अनोखी पहल की है. उसने एशिया में वेश्याओं के इस सबसे बड़े घर में एचआईवी और एड्स जैसी जानलेवा बीमारियों का प्रसार रोकने के लिए कुछ ख़ास लोगों की सहायता ली है. और ये लोग हैं इस वेश्यालय के स्थाई ग्राहक. इसके लिए स्थाई ग्राहकों का एक संगठन ‘साथी’ भी बनाया गया है. ‘साथी’ के ये लोग अब इस वेश्यालय में जिस्म का धंधा करने वाली वेश्याओं और यहां आने वाले नए ग्राहकों को सुरक्षित सेक्स का पाठ पढ़ाते हैं. पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के उत्तरी इलाके में स्थित सोनागाछी में लगभग 10 हज़ार वेश्याएँ रहती हैं. लेकिन ‘दुर्बार’ और उसके सहयोगी संगठन ‘साथी’ की कोशिश है कि यहाँ आने वाला हर कोई ‘ख़तरों’ से पहले से ही परिचित रहे. प्रशिक्षण वैसे, यहाँ आने वाले ज़्यादातर ग्राहक एड्स या सुरक्षित सेक्स के बारे में अनभिज्ञ हैं, लेकिन ‘साथी’ ने ऐसे लगभग दो सौ नियमित ग्राहकों की एक सूची बनाई है जो यहां आने वाले ग्राहकों को कंडोम के इस्तेमाल और नियमित तौर पर ख़ून की जाँच के बारे में बताते हैं.
इस वेश्यालय में नियमित तौर पर आने वाले सुनील मुखर्जी कहते हैं, “हम सोनागाछी में ही अपना ज्यादातर समय बिताते हैं. इसलिए यहां आने वाले नए ग्राहकों को संक्रामक बीमारियों के प्रति आगाह करना हमारा कर्त्तव्य है.” वे कहते हैं, “शरीर की भूख मिटाने के लिए यहां आने वाले ज़्यादातर लोग कंडोम का इस्तेमाल करने से मना कर देते हैं और यहीं से हमारा काम शुरू होता है.” मुखर्जी व उनके दोस्त रोजाना शाम को वेश्यालय का दौरा करते हैं ताकि ग्राहकों व वेश्याओं को सुरक्षित सेक्स के तरीकों की जानकारी देकर उनको भी एड्स जागरूकता अभियान में शामिल किया जा सके. बदलती स्थितियाँ मुखर्जी कहते हैं, “कुछ ग्राहक तो उनकी बात सुनने के लिए तैयार ही नहीं होते. लेकिन ज़्यादातर लोग न सिर्फ़ उनकी बातों को ध्यान से सुनते हैं बल्कि सुरक्षित सेक्स के तरीक़ों की जानकारी देने वाला परचा भी ले लेते हैं.”
दुर्बार महिला समन्वय समिति का दावा है कि इस साल की शुरूआत में शुरू की गई इस परियोजना के तहत अब तक पाँच हजार से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित सेक्स के तरीकों से अवगत कराया जा चुका है. समिति की परियोजना निदेशक भारती डे, जो खुद भी देह व्यापार में रह चुकी हैं, कहती हैं, “हमने इस परियोजना के तहत अब तक जितने लोगों को सलाह दी है उनमें से 80 फीसदी ग्राहक व वेश्याएँ अब कंडोम का इस्तेमाल करती हैं. लेकिन अब भी इस मामले में बहुत कुछ किया जाना है.” सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं, सोनागाछी आने वाले 90 फीसदी लोगों को अब तक इस बात की जानकारी नहीं है कि यौन संबंधों के ज़रिए भी एड्स हो सकता है. कार्यकर्ता कहते हैं कि यौनजनित बीमारियों की जानकारी देने से फ़ायदा हो रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारी व राज्य के पूर्व स्वास्थ्य निदेशक प्रभाकर चटर्जी कहते हैं, “देश में एड्स के बढ़ते प्रकोप को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई इस परियोजना के बेहतर नतीजे सामने आ रहे हैं और यही वक़्त की ज़रूरत है.” सोनागाछी इलाक़े में रोज़ाना हज़ारों नए ग्राहक आते हैं. |
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‘सेक्स एंड द सिटी’ के प्रमोशन पर खूब हुई मस्ती
दैनिक भास्कर - 8 अप्रैल 2008 आने वाली फिल्म ‘सेक्स एंड द सिटी’ के कलाकार उसके प्रमोशन के दौरान खूब मस्ती कर रहे हैं। फिल्म 30 मई को रिलीज होने वाली है। वेबसाइट ‘इनटचवीकली डॉट हॉलीवुड डॉट कॉम’ के अनुसार, फिल्म प्रमोशन के मौके पर कलाकार साराह जेसिका पार्कर, किम कैटरैल, क्रिस्टिन डेविस और सिंथिया निक्सन ने जमकर फोटो खिंचवाए। जाने माने कैमरामैन मैरी एलेन मैथ्यूज ने जमकर उनकी तस्वीरें लीं और कहा, ‘‘वे सभी वहां खूब मस्ती कर रहे थे। उन चारों के बीच की … |
![]() दैनिक भास्कर |
मैं सेक्स सिंबल नहीं हूं: मिरेन
दैनिक भास्कर - 1 अप्रैल 2008 आस्कर पुरस्कार विजेता अभिनेत्री डेम हेलेन मिरेन ने अपने आप को सेक्स सिंबल मानने से इंकार करते हुए कहा है कि वह एक सामान्य महिला हैं। वेबसाइट ‘दी सन डॉट को डॉट यूके’ ने 62 वर्षीय अभिनेत्री के हवाले से बताया, ‘‘मैं अपने आप को एसेक्स की एक लड़की के रूप में देखती हूं जिसने आजीवन संघर्ष किया। बाकी लोग मुझे कैसे देखते हैं यह एक अलग मसला है। उस पर मेरा नियंत्रण नहीं है।’’ मिलर को ‘दि क्वीन’ फिल्म में उनके अभिनय के लिये आस्कर पुरस्कार … |
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स्टडी में हुआ खुलासा, मोर टेंशन, मोर सेक्स
नवभारत टाइम्स - 24 मार्च 2008 नई दिल्ली : खुश रहने वाली महिलाओं के मुकाबले तनाव में रहने वाली महिलाएं ज्यादा सेक्स करती हैं। एक नई स्टडी के मुताबिक सेक्स से इन महिलाओं को अपनी असुरक्षा की भावना से छुटकारा पाने में मदद मिलती है। ऑस्ट्रेलिया में रिसर्चरों ने जांच में पाया कि जो महिलाएं हल्के या गहरे मानसिक अवसाद से गुजरती हैं वे समान्यत: खुश रहने वाली महिलाओं के मुकाबले में तीन गुना ज्यादा सेक्स करती हैं। स्टडी के मुताबिक तनावग्रस्त महिलाओं का ज्यादा … |
![]() सिफी |
सेक्स की सी अनुभूति देता है मंच पर प्रदर्शन : जैग
सिफी - 26 मार्च 2008 मशहूर बैंड रोलिंग स्टोंस के प्रमुख गायक मिक जैगर ने कहा है कि मंच पर अपने कार्यक्रम देना उन्हें सेक्स जैसा आनंद देता है और उन्हें इसका नशा हो गया है। वेबसाइट ‘दी सन डॉट को डॉट यूके’ ने जैगर के हवाले से कहा, ‘‘यह सेक्स की तरह है। यह नशा है। इसीलिए मैं इसे करता हूं लेकिन आप इसे हमेशा नहीं कर सकते। आप को इसे सही समय पर करना होगा। यह वैसा ही है जैसे आप जवानी में सोचते हैं कि आप हर समय सेक्स करें। यह बहुत शानदार अनुभव है।’’ |
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उजबेक महिला के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी
याहू! भारत - 14 अप्रैल 2008 इस महिला पर आरोप है कि वह राज्य में अंतराष्ट्रीय सेक्स रैकेट चलाती है। मामले की जांच कर रहे पुलिस निरीक्षक संदेश चोदंकर ने बताया कि राज्य अपराध शाखा ने सेक्स रैकेट में शामिल चार उजबेक महिलाओं को गिरफ्तार किया था। इन महिलाओं ने पूछताछ में खुलासा किया कि 40 साल की महिला गुलनोवरा सेक्स रैकेट की सरगना है। पुलिस निरीक्षक ने बताया कि गुलनोवरा ने बताया कि गुलनोवरा शहर के पोरवोरिम इलाके में अपने भारतीय पार्टनर के साथ रहती थी। … |
![]() दैनिक भास्कर |
महिलाएं एक नजर में भांप लेती हैं पुरुष के इरादे
दैनिक भास्कर - 9 अप्रैल 2008 डरहम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि व्यक्ति का चेहरा सेक्स के प्रति उसका रवैया साफ उजागर कर देता है। नाक, जबड़े व आंखों के आकार से इसका संकेत मिलता है। ‘इवॉल्यूशन एंड ह्यूमन बिहेवियर’ नामक पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट में प्रमुख शोधकर्ता लिंडा बूथ्रॉइड ने कहा, ‘चेहरा देखकर सेक्स के इरादे भांपे जा सकते हैं। इससे जाहिर होता है कि कैसे हम पहली मुलाकात में अपने संभावित साथी या प्रतिद्वंद्वी का आकलन करते … |
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भागदौड़ की जिंदगी जीने वालों को मूत्र रोग की आशंका
हिन्दुस्तान दैनिक - 6 अप्रैल 2008 जवाब :- सेक्स के दौरान पुरुषों के मूत्राशय का मार्ग बन्द हो जाता है जिसके कारण उस मार्ग से शुक्राणु का स्त्राव होता है। सामान्यत: यौन क्रिया के आधे-एक घंटे के बाद मूत्राशय की स्थिति सामान्य होती है। ऐसे में सेक्स के बाद पेशाब करने पर जलन और तकलीफ की शिकायत हो सकती है। सेक्स के तुरंत बाद पुरुषों को पेशाब करने से परहेज करना चाहिए। महिलाओं में इस प्रकार की शिकायत नहीं पायी जाती है। इस प्रकार की शिकायत के लिए इलाज की आवश्यकता … |
![]() दैनिक भास्कर |
युवा पुरुषों को यौन अनुभवों से समृद्ध महिलाओं से डर लगता है।
दैनिक भास्कर - 18 अप्रैल 2008 इंस्टीटच्यूट के एरिक जेनस्सन कहते हैं कि हमने पुरुषों की यौन प्रतिक्रियाओं को मापने का हर संभव तरीका आजमाया। हमने यौन व्यवहारों के बारे में पूछताछ करने के लिए प्रoAावली और सर्वेक्षणों का सहारा लिया। अध्ययन में 18-24, 25-45 और 46 वर्ष से ज्यादा उम्रके पुरुषों के तीन समूह बनाए गए। कुछ पुरुषों ने कहा कि सेक्स के समय पकड़े जाने का भय उनकी सेक्स संबंधी क्षमता को कम करता है जबकि अन्य लोगों ने कहा कि इससे उनकी उत्तेजना बढ़ती है। … |
![]() दैनिक भास्कर |
डेनियल की मां नहीं बन पाएंगी किम
दैनिक भास्कर - 10 अप्रैल 2008 लंदन. लोकप्रिय अमेरिकी टेलीविजन कार्यक्रम ‘सेक्स एंड द सिटी’ की अभिनेत्री किम कैटरॉल ‘माई ब्वाय जक’ फिल्म में डेनियल रेडिक्लीफ के मां का किरदार नहीं निभा पाएंगी। वेबसाइट ‘कांटेक्ट म्यूजिक डाट कॉम’ के अनुसार किम इस किरदार के लिए उपयुक्त नहीं हैं। दरअसल जिस पात्र को किम को निभाना था वह काफी उदासीन चरित्र से जुड़ा पात्र है। वहीं ‘सेक्स एंड द सिटी’ की यह कलाकार •ुछ ज्यादा उत्तेजक दिखती हैं। गौरतलब है कि किम ‘माई ब्वॉय जक’ में … |
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